फिर वही पूराने दिनो वाला ब्लाग

आज मन मे आया की कूछ पुराने ब्लाग पोस्ट पढता हूं और फिर उस समय की लिखावट देख कर हसी आने लगी। एक दो ब्लाग पोस्ट के टाईटल और कूछ लाईने पढ कर लगा की यह क्या लीखता था।

जैसे यह पोस्ट और कई अन्य 2009, 2010 के पोस्ट।

जब हम खाली रहते हैं और कोई व्यावसायिक चीज के लिये काम नही करते तो कितनी अच्छाई भरी होते है पर जब आप किसी बिजनेस मे चले जाते हैं तो आपकी लिखावट मे बहोत बदलाव आ जाता है। जोक, आदी मे भी आप अपने व्यावसाय का जीक्र नही छोड पाते हैं।

और ईसी बात का अनूभव हूवा जब मैने अपने ब्लाग के पूराने पोस्ट देखे और कुछ नए पोस्ट देखे तो पाया की नए वाले मे ज्यादातर व्यावसाय से प्रभावीत लेख हैं और पुराने वाले खूले मन से लिखा हूवा लेख।

फिर चिट्ठाजगत के कुछ पेज भी देख कर कई ब्लाग मिले जीनको अक्सर पढता था।

चिट्ठाजगत का तकनीकी ब्लाग लिस्ट।

ज्यादातर उस समए के ब्लाग अभी भी उसी तरह हैं और डिलीट नही हूवे हैं 😉

1 responses to “फिर वही पूराने दिनो वाला ब्लाग

सर ब्लॉग या वेबसाइट पर ट्रैफिक कैसे बढ़ाये और ज्यादा से ज्यादा बच्क्लिंक कैसे बनाए इस पर भी एक post लिखिए जिससे ब्लिग को सर्च मैं ले के आ सके |
धन्यवाद !

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